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SANAK — BADSHAH

Paroles · BADSHAH

SANAK

BADSHAH

2023

प्यार इतना ज़ादा दिया के वो रोने लगी
मानसिक संतुलन अपना खोने लगी
पहले गंदा किया फिर खुद ही ढोने लगी
एक रात में ही लोवे उसे होने लगी
मैने बोला एक छोटी सी फाइट है
सुबेह ठीक 6 बजे मेरी चंडीगार्ह की फ्लाइट है
शेड्यूल तोड़ा टाइट है
कहती आदित्या झूठ बोलने की भी एक हाइट है
कैसे बताओन लाइफ झूठों से बनी
पीए ज़हेर के जो घूतों से बनी
मेरी ना किसी इंसान से बनी
बनी तो बस कब्रिस्तान के भूतों से बनी
मैं कभी बोहट ज़ादा साद कभी बोहट ही फन्नी
मेरे गोयर्ड के बाग कानों में टिफनी
मेरे और जीत के बीच कोई बुत इफ़ नि
सी******* की टिप्पणी पे ना करूँ टिप्पणी
तेरे जैसा कहाँ से मैं आँड चाट्ता है तू
मैं उपरवाले से ब्रह्मांड माँगता फिरून
कभी सेक्स तो कभी गयाँ बाँटता फिरून
जो भी जलता है उसकी ग**** फाड़ता फिरून
हिट पे हिट मैं मारता फिरून
3 रात लगातार मैं जागता फिरून
भोलेनात के साथ मेरी बनती है सही
उसे नचाने का शौंक मैं नाचता फिरून
मेरा पियर नचौंदा वे सजना
सानू ते नाचना नई औंदा
मेरा पियर नचौंदा वे सजना
सानू ते नाचना नई औंदा
हमें डूबने का शौंक था, उसे बचना आता था
हमें मचने का शौंक था, उसे मचाना आता था
जोड़ी क्या ही ख़तरनाक थी हमारी
के हमें नाचने का शौंक था, उसे नचाना आता था
मेरा पियर नचौंदा वे सजना
सानू ते नाचना नई औंदा
मेरा पियर नचौंदा वे सजना
सानू ते नाचना नई औंदा

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