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MAIN RANG SHARBATON KA — ATIF ASLAM

Paroles · ATIF ASLAM

MAIN RANG SHARBATON KA

ATIF ASLAM

2013

ख़्वाब है तू, नींद हूं मैं
दोनों मिले रात बने
रोज़ यही मांगूं दुआ
तेरी मेरी बात बने, बात बने

मैं रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मैं रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मुझे खुद में घोल दे तो
मेरे यार बात बन जानी

रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मैं रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मुझे खुद में घोल दे तो
मेरे यार बात बन जानी

रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मैं रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी

ओ यारा तुझे प्यार की बतियां, क्या समझावां
जाग के रतियां रोज़ बितावां
इससे आगे अब मैं क्या कहूं

ओ यारा तुझे बोलती अंखियां सदके जावां
मांग ले पकियां आज दुवां
इससे आगे अब मैं क्या कहूं

मैंने तो धीरे से
नींदों के धागे से
बांधा है ख़्वाब को तेरे
मैं ना जहां चाहूं
ना आसमान चाहूं
आ जा हिस्से में तू मेरे

तू ढंग चाहतों का
मैं जैसे कोई नादानी
तू ढंग चाहतों का
मैं जैसे कोई नादानी
मुझे खुद से जोड़ दे तो
मेरे यार बात बन जानी

रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मैं रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी

तेरे ख़यालों से, तेरे ख़यालों तक
मेरा तो है आना जाना
मेरा तो जो भी है
तू ही था, तू ही है
बाकी जहां है बेगाना

तुम एक मुसाफ़िर हो
मैं कोई राह अनजानी
तुम एक मुसाफ़िर हो
मैं कोई राह अनजानी
मन चाहा मोड़ दे तो
मेरे यार बात बन जानी

रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मैं रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी
मुझे खुद में घोल दे तो
मेरे यार बात बन जानी
रंग शर्बतों का
तू मीठे घाट का पानी

ओ यारा तुझे प्यार की बतियां, क्या समझावां
जाग के रतियां रोज़ बितावां
इससे आगे अब मैं क्या कहूं

ओ यारा तुझे बोलती अंखियां सदके जावां
मांग ले पकियां आज दुवां
इससे आगे अब मैं क्या कहूं

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