साथी रे, थोड़ा ठहर जा
अभी रास्ते कुछ बदल से जाएँगे
ओ, साथी रे, थोड़ा ठहर जा
ये पाँव भी अब संभल से जाएँगे
फिर वही बरसात होगी
और अश्क सारे धुल से जाएँगे
रोशनी दिन-रात होगी
और सब झरोखे खुल से जाएँगे
यारा, तू ही तो बंदगी है
यारा, तू ही दुआ
यारा, कैसी ये बेरुखी है?
क्यूँ जुदा तू हुआ?
कहना था और क्या-क्या मुझे
नींद क्यूँ आ गई फिर तुझे?
साथी रे, थोड़ा ठहर जा
अभी मौसमों का बदलना बाक़ी है
ओ, साथी रे, थोड़ा ठहर जा
कुछ दूर साथ चलना बाक़ी है
फिर उन्हीं रास्तों पे
तेरे-मेरे कदमों का मिलना बाक़ी है
दर्द में, रंजिशों में
संग बुझना और जलना बाक़ी है
यारा, तू ही तो बंदगी है
यारा, तू ही दुआ
यारा, कैसी ये बेरुखी है?
क्यूँ जुदा तू हुआ?
यारा, तू ही तो बंदगी है
यारा, तू ही दुआ
यारा, कैसी ये बेरुखी है?
क्यूँ जुदा तू हुआ?
हाँ, तेरे और मेरे दरमियाँ
अब भी बाक़ी है एक रास्ता
Paroles à titre informatif uniquement.