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AAJ ZID

ARIJIT SINGH

2018

तुम थे यहीं
फिर भी तुम गुम्म थे
और मैं लापता
अब जो मिले हो तो
फिर साथ ही में ही रह जाओ न

तुम थे यहीं
फिर भी तुम गुम्म थे
और मैं लापता
अब जो मिले
हो तो फिर साथ ही में ही रह जाओ न

थोड़े थोड़े से पूरे और थोड़े अधूरे
यह वाडे रहे क्या पता
पूरे होंगे कई ख्वाब
रह जायेंगे कुछ अधूरे

अभी क्या पता
आ जाओ न
आ जाओ न
आ जाओ इतना भी क्या सोचना

आ जाओ न
आ जाओ न
आ जाओ इतना भी क्या सोचना

थोड़ा सही एक दुसरे में आ रह लें कहीं
आ जी भी लें
कब, क्यों, कहाँ, कैसे सोचें नहीं

आ चल वादों के भटके हुए
जुगनुओं को दिखा दे सही रास्ता
आ चल सोते सितारों को हौले से
सेहला के रोशन करें आसमान
आ जाओ न

आ जाओ न
आ जाओ इतना भी क्या सोचना
आ जाओ न
आ जाओ न
आ जाओ इतना भी क्या सोचना

शामें कई होंगी ठहरी हुई
बातें कयी होंगी रूठी हुई
छोटी सी ज़िद होगी लंबी सी रातें
फिर भी प्यार रह जायेगा

रहता हमेशा तो कुछ भी नहीं
फिर भी न जाने क्यों मुझको यकीं
सब बीतने पर भी, सब छूटने पर भी
यह प्यार रह जायेगा

तुम थे यहीं
फिर भी तुम गुम्म थे
और मैं लापता
अब जो मिले हो तो फिर
साथ ही में ही रह जाओ न
थोड़े थोड़े से पूरे

और थोड़े अधूरे
यह वाडे रहे क्या पता
पूरे होंगे कई ख्वाब
रह जायेंगे कुछ अधूरे
अभी क्या पता

आ जाओ न
आ जाओ न
आ जाओ इतना भी क्या सोचना

आ जाओ न
आ जाओ न
आ जाओ इतना भी क्या सोचना

आ जाओ न
आ जाओ न
आ जाओ इतना भी क्या सोचना

Paroles à titre informatif uniquement.

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